ब्रेडक्रम्ब
Key Loan Terminologies Every Entrepreneur Should Know
क्या आप अपने बिज़नेस को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन पैसों की कमी को लेकर परेशान हैं? बिज़नेस लोन के उपलब्ध होने से आपके बिज़नेस को आगे बढ़ाने मदद मिल सकती है। इस लोन की मदद से आप अपने ग्राहकों को प्रीमियम क्वालिटी के प्रोडक्ट और सेवाएं उपलब्ध करा सकते हैं। लेकिन, लोन लेने से पहले कुछ व्यावसायिक शब्दों (बिज़नेस टर्मिनोलॉजी) को समझना जरूरी है।
निम्नलिखित ग्लॉसरी में कुछ खास शब्दों की स्पष्ट और संक्षिप्त परिभाषा दी गयी है:
1) लोन की अवधि
यह वह अवधि है जब उधारकर्ता फाइनेंशियल इंस्टीटूशन को लोन की राशि वापस चुकाता है। लोन की अवधि कुछ महीनों से लेकर कई वर्षों तक हो सकती है, यह लोन ली गई राशि और लगाए गए ब्याज की दर पर निर्भर करता है।
2) ब्याज
यह वह धनराशि है जो किसी कंपनी को लोन की राशि के अलावा चुकानी पड़ती है, यह लोन लेने की लागत होती है।
3) ब्याज दर
यह बिज़नेस लोन का वह प्रतिशत है जो कोई फाइनेंशियल इंस्टीटूशन उधारकर्ता से लेती है। कंपनी इसकी गणना लोन की मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) के आधार पर करती है।
4) मूल राशि
यह वह राशि है जो कोई व्यक्ति लोन पर लेता है। यह राशि उस ब्याज दर की गणना करने का आधार है जिसे उधारकर्ता को एक निश्चित समय में चुकाना होता है। लोन साइकिल की अवधि तय करने में इस राशि की खास भूमिका होती है। यदि मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) कम हो, तो उधारकर्ता को कम समय सीमा के भीतर ज्यादा ब्याज दरों पर पैसे चुकाने पड़ सकते हैं। दूसरी ओर, अधिक मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) होने पर उधारकर्ता कम ब्याज दर और लंबी अवधि में अपने डेब्ट को चुका सकता है। उधारकर्ता को वित्तीय कंपनी द्वारा निर्धारित ब्याज दर के साथ मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) वापस चुकानी होती है।
5) EMI
इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट वह निश्चित राशि होती है जो उधारकर्ता को लोन पूरा होने तक लोन देने वाली संस्था को देनी होती है। इससे उधारकर्ताओं को अपने खर्चों की बेहतर योजना बनाने में मदद मिलती है और वह अपनी बिज़नेस ज़रूरतों को पूरा करने के लिए बड़ी रकम एक साथ चुकाने के दबाव से बच जाता है। लोन ली गई राशि में मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट), लोन की अवधि और ब्याज दर सहित कई चीजों को ध्यान में रखकर ही EMI तय की जाती है।
जहां,
P = मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट)
R = मासिक ब्याज दर
n = मासिक किस्तों की संख्या
6) परिपक्वता तिथि (मैच्योरिटी डेट)
यह वह तिथि है जिस पर लोन ली गई धनराशि का मूल राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) देय हो जाता है। इस दिन, उधारकर्ता को बकाया राशि पूरी तरह से चुकानी होती है। आमतौर पर, यह मानते हुए कि पिछले सभी पेमेंट नियमित रूप से समय पर किए गए थे, यह वह तिथि होती है जब उधारकर्ता अपनी अंतिम EMI पेमेंट करता है। जब उधारकर्ता लोन चुका देता है, तो उधारकर्ता और वित्तीय कंपनी के बीच डेब्ट एग्रीमेंट समाप्त हो जाता है। सिक्योर्ड बिज़नेस लोन के मामले में, परिपक्वता तिथि (मैच्योरिटी डेट) तक लोन की सभी किस्तें समय पर चुकाने के बाद, वित्तीय कंपनी द्वारा गिरवी रखी गई ऐसेट्स उधारकर्ता को लौटा दी जाती हैं।
7) देय खाते
यह वो राशि है जो कोई बिज़नेस अपने वेंडर्स और सप्लायर्स को आवश्यक सामग्री, स्टॉक और उपकरण प्रदान करने के लिए देता है आमतौर पर, देय वस्तुओं में कानूनी फीस, कॉन्ट्रैक्टर की पेमेंट, सप्लायर इनवॉइस और अन्य शुल्क शामिल होते हैं। देयताएँ ((पेएबल्स) बैलेंस शीट में दायित्व (लायबिलिटी) के रूप में दिखाई जाती हैं, जिसमें डेब्ट, वेतन और अन्य अतिरिक्त खर्च शामिल होते हैं।
8) प्राप्य खाते
यह वह धनराशि है जो ग्राहक कंपनी द्वारा दी जाने वाली सेवाओं और वस्तुओं के लिए कंपनी को देते हैं। दूसरे शब्दों में, यह वह पेमेंट होती है जिसकी उम्मीद कोई बिज़नेस अपने उत्पादों और सेवाओं को देने के बाद करता है।
9) लाइन ऑफ क्रेडिट
यह किसी लेंडिंग इंस्टीटूशन से एक निश्चित राशि की पूंजी प्राप्त करने की अनुमति देती है। यह लेंडिंग इंस्टीटूशन और कंपनी के बीच एक फाइनेंशियल एग्रीमेंट होता है, और यह कंपनी को EMI के रूप में लोन चुकाने की सुविधा देता है।
किसी भी बिज़नेस के लिए लोन लेने से पहले व्यावसायिक शब्दावली (बिज़नेस टर्मिनोलॉजी) को समझना आवश्यक है ताकि किसी भी बिज़नेस फाइनेंशियल सलूशन का लाभ उठाने से पहले समझदारी भरे निर्णय लिए जा सकें।
अर्का में, हम आपकी जरूरतों के अनुसार सिक्योर्ड बिज़नेस लोन देते हैं। ये आपके बिज़नेस की उत्पादकता बढ़ाने या बिज़नेस का विस्तार करने में भी आपकी मदद कर सकता है।